Tuesday, November 4, 2014

आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांत

प्रिय मित्रों नमस्कार ,
आज मैं मन ,बुद्धि ,अहंकार ,पञ्च तन्मात्रा , पञ्च महाभूत ,ज्ञानेन्द्रिया ,कर्मेन्द्रिया और आत्मा इन सब के बारे में चर्चा करना जा रहा हूँ .....
मन के बारे में सबसे पहले बात करते हैं मन क्या है मन उभएंद्रिय है अर्थात ज्ञानेन्द्रिया और कर्मेन्द्रिया के साथ कार्य करने वाली इन्द्रिय , मन इसके कार्य हैं चिंतन विचार्य उह्यम ध्येय और संकल्प .. यानि चिंतन विचार करना उहापोह करना तुलना करना ,ध्येय यानि लक्ष्य का निर्धारण करना और संकल्प करना .
मन चंचल है वैसे तो यह सम्पूर्ण शारीर में संचरण करता है लेकिन इसके प्रमुख स्थान ह्रदय और मस्तिष्क हैं . ये तो हुयी मन की बात
अब बात करते हैं बुद्धि की ,बुद्धि का स्थान मुख्या रूप से मस्तिष्क ही है . बुद्धि का कार्य सही और गलत में भेद करना और निर्णय करना मन के द्वारा प्राप्त जानकारी का विश्लेषण करना और आत्मा में जानकारी उपलब्ध करवाना ....
आत्मा ज्ञान स्वभावी है और ज्ञान का ग्रहण करती है . आत्मा एक दर्पण है जो ज्ञान मन बुद्धि के द्वारा प्राप्त होता है आत्मा में परिलक्षित होता है ,
सुख दुःख इच्छा द्वेष चेष्टा ये सब मन के भाव हैं , आत्मा निर्विकार है इसका कार्य केवल मन बुद्धि के संनिकर्ष से प्राप्त ज्ञान का अनुभव करना है .....
अब अहंकार क्या है ,अहंकार का अर्थ है अहम् और कार याने मैं हूँ ,यानि की अस्तित्व का ज्ञान करने वाला अहंकार ...... घमंड नहीं ,
पञ्च तन्मात्रा यानि सूक्ष्म भाग जिनके संयोग से महाभूत की उत्पाती होती है . और सभी द्रव्य पंचभौतिक हैं .
जब कभी मन और बुद्धि का लोप होता है और सिर्फ आत्मा सक्रिय होती है ऐसी अवस्था को आधुनिक चिकित्सा में COMA कहा जाता है , ऐसी अवस्था में शारीर निष्क्रिय होता है ऐच्छिक क्रियाकलाप नहीं होता लेकिन आत्मा की उपस्थिति में शारीर की सामान्य क्रियाएँ चलती रहती हैं ...
आयुर्वेद शास्त्रों में मद मूर्छा और सन्यास का वर्णन मिलता है , जिसका की अगली बार विस्तार से चर्चा करेंगे .
यहाँ सभी की मूलभूत चर्चा की है ,तथा उनके एक दुसरे से क्या सम्बन्ध है उसके बारे में बात की है .
आपका अपना
वैद्य अभिषेक गोयल
अशोकनगर, म०प्र० 

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