Wednesday, September 3, 2014

Thyroid: know more about it

क्या आप Thyroid से पीड़ित है ? 


आयुर्वेद में इस समस्या को अवटुक ग्रंथि विकृति कहते है । आजकल यह समस्या बहुत तेजी से लोगों को हो रही है । 

थाइरोइड ग्रंथि (Thyroid Gland) कैसे कार्य करती है ?
इससे दो तरह के हॉर्मोन्स का स्राव होता है जिनका नाम T3 एवं T4 है ।
T3 एवं T4 थाइरोइड ग्रंथि से निकलने वाले हॉर्मोन्स होते है ।
थाइरोइड ग्रंथि का संचालन TSH हॉर्मोन की वजह से होता है . TSH हॉर्मोन Pituitary (पिट्यूटरी) नामक ग्रंथि से निकलने वाला हॉर्मोन है जो कि थाइरोइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है जिससे T3 एवं T4 हॉर्मोन्स निकलते है ।
इन तीनों हॉर्मोन्स में गड़बड़ी / वृद्धि या क्षय होने पर Thyroid gland से सम्बंधित रोग होता है ।

यह समस्या दो प्रकार की होती है एक Hyperthyroid और दूसरी Hypothyroid

जिनमे TSH लेवल कम होता है और T3 एवं T4 का लेवल बढ़ जाता है ,तो इस समस्या को Hyperthyroid कहते है ।

जिनमे TSH Level बढ़ जाता है और T3 एवं T4 का लेवल कम हो जाता है । तो इस समस्या को Hypothyroid कहते है ।
सामान्यतः Hypothyroid की समस्या लोगों को ज्यादा होती है ।

Hyperthyroid के लक्षण - Hyperthyroid होने पर शारीरिक लक्षण - घबराहट , चक्कर, वजन घटना , अधिक पसीना आना, किसी भी काम में ध्यान न लग पाना , बार-बार पतले दस्त होना आदि । आयुर्वेद के अनुसार इसे वात-पित्त दोष की वृद्धि से होने वाला रोग कह सकते है ।

Hyperthyroid के कारण - थाइरोइड ग्रंथि में किसी तरह की विषाक्तता , आयोडीन का काम सेवन , थाइरोइड ग्रंथि में सूजन आ जाना ग्रेव्स डिजीज (Graves' disease){इस रोग के विषय में जानने के लिए गूगल में सर्च करके पढ़ें} का होना आदि ।

Hypothyroid के लक्षण - Hypothyroid होने पर शारीरिक लक्षण - अधिक नींद आना , वजन बढ़ना , मासपेशियों में दर्द , कब्ज होना , बालों का अधिक झड़ना , त्वचा में रूखापन, स्त्रियों में अनियमित मासिक धर्म का होना आदि । आयुर्वेद के अनुसार इसे वात-कफज दोष की वृद्धि से होने वाला रोग कह सकते है ।

Hypothyroid के कारण - अधिक मात्र में आयोडीन का सेवन , किसी तरह का ऑपरेशन हो जाने पर , किसी तरह की शारीरिक चोट लगने पर ।
इस रोग की आयुर्वेद में प्रभावशाली चिकित्सा की जा सकती है

चिकित्सा -
Hyperthyroid में - प्रवाल पिष्टी , शतावरी चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण , गिलोय सत्व , कांचनार गुग्गुल का प्रयोग बहुत लाभकारी है ।

Hypothyroid में - मुक्ताशुक्ती पिष्टी बहुत उपयोगी है, इस रोग में पुनर्नवा चूर्ण के साथ देने से इसके बहुत अच्छे परिणाम आते है , कांचनार गुग्गुल और आरग्वध क्वाथ के साथ देने पर तेजी से TSH Level सामान्य होने लगता है । यह समस्या होने पर अपने पास के आयुर्वेद चिकित्सक से अवश्य मिलें आयुर्वेद में आप इस रोग से निजात पा सकते है और जीवन भर आधुनिक औषधियों के सेवन से भी बच सकते है ।

No comments:

Post a Comment