Tuesday, September 16, 2014

पानी कब पियें, कब ना पियें?


जानिए पानी आपके शरीर के लिए कब फायदेमंद है और कब नुकसानदेह !

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सामान्यतः पानी के विषय में यह बात प्रचलित है कि इसका अधिक सेवन करने से लोग स्वस्थ्य रहते है लेकिन कई ऐसे भी रोग व परिस्थितियाँ हैं जिनमे पानी का सेवन या अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह भी हो सकता है !

यह सुन कर आप चौंक गए न ? पानी के गुण व नुकसान जानने के लिए इस लेख को अवश्य पढ़ें !

मनुष्य के शरीर में कुल वजन का लगभग 60% हिस्सा पानी होता है।
पानी को जीवन का अमृत माना जाता है , पानी के बिना जीवन की कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती !

एक सामान्य मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन लगभग 2-1/2 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए ।

इस लेख के माध्यम से हम आपको पानी के विषय में कुछ विशेष तथ्य बताएँगे जिन्हे जानकर आप अपने जीवन में अपनाकर स्वस्थ और रोगमुक्त रह सकते है। पानी किन अवस्थाओं / रोगों में लाभ पहुँचाता है और कब नुकसान ! जानते है इन तथ्यों से -

शरीर में पानी के लाभ व कब और कैसे करें पानी का इस्तेमाल -

स्वस्थ्य व्यक्तियों को सुबह उठकर 1 गिलास गुनगुना पानी नियमित रूप से पीना चाहिए । इससे शरीर में मौजूद दूषित पदार्थ शरीर के बहार निकल जाते है , पेट अच्छे से साफ हो जाता है , कब्ज की समस्या नहीं होती , गैस नहीं बनती, शरीर में जमा होने वाली अतरिक्त चर्बी कम होती है, पाचन तंत्र अच्छा होता है , जुकाम - खांसी कम होती है , शरीर में रक्त का संचार अच्छे से होता है , त्वचा में चमक आती है व कील - मुहांसे नहीं होते , डेंड्रफ कम होता है व बाल लम्बे व घने होते है ।

इन अवस्थाओं और समस्याओं में पानी ज्यादा पीना चाहिए -

हेपेटाइटिस व पीलिया में , बुखार में , गर्भावस्था में , पथरी की समस्या में व जिन लोगों को पसीने की दुर्गन्ध ज्यादा आती है उनको पानी ज्यादा पीना चाहिए ।

इन अवस्थाओं और समस्याओं में पानी बहुत कम या चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही पीना चाहिए -

निमोनिया की समस्या में , फेफड़ों में पानी भर जाने पर ( उरस्तोय/ Plural Effusion ), पेट में पानी भर जाने पर (जलोदर/Asitis ), किडनी फेलियर में, लिवर सिरोसिस होने पर, ह्रदय से सम्बंधित कोई रोग होने पर , शरीर की किसी तरह की सर्जरी होने पर , पैरों में सूजन होने पर , नवजात शिशु (छोटे बच्चों में- जन्म होने के कम से कम 8 महीनों तक ) को पानी बहुत कम या चिकित्सक के परामर्श के बाद ही देना चाहिए ।

इन अवस्थाओं में अधिक पानी देने से समस्या बढ़ जाती है इसलिए बहुत ही सावधानी से चिकित्सक के परामर्श के बाद ही ऐसी स्थितियों में पानी का प्रयोग करें ।

विशेष - पानी हमेशा बैठ कर पीना चाहिए , खड़े होकर पानी पीने से पानी सीधे आंतो में जाता है जिससे आंतो को क्षति पहुंच सकती है , हाई बी.पी. की समस्या जल्दी आ सकती है । शरीर के लिए आवश्यक मात्रा से कम पानी पीने से चेहरे पर झुर्रियां आ सकती है , शरीर में पानी की कमी से उल्टी , चक्कर, दस्त आदि हो सकते है । यात्रा के दौरान साफ़ और स्वच्छ पानी ही पियें , किसी भी जगह से या अशुद्ध पानी का प्रयोग न करें इससे आपको कई प्रकार के संक्रमण हो सकते है ।

आप सभी से यह अपील है कि किसी भी रोग में या शारीरिक या मानसिक परेशानी में स्वयं से या सुनी हुई बातों के अनुसार चिकित्सा न करें और न ही किसी भी तरह के छोटे-मोटे नुस्खे आदि का प्रयोग करें क्योकि किसी रोग विशेष में जब पानी जैसी चीज समस्या पैदा कर सकती है तो बिना चिकित्सक की परामर्श से कोई नुस्खा या उपचार भी आपको परेशानी में डाल सकता है ।

कोई रोग होने पर अपने पास के विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें । आयुर्वेद में विभिन्न प्रकार के रोगों का उपचार मौजूद है गंभीर और कष्टकर रोगों का भी अच्छा उपचार आयुर्वेद में मौजूद है इसके लिए आप अपने पास के आयुर्वेद चिकित्सक से अवश्य मिलें क्योकि आयुर्वेद सिर्फ रोगों का उपचार नहीं करता अपितु जिन कारणों से रोग उत्पन्न होता है उनको समाप्त करता है जिससे रोग पूर्ण रूप से ठीक हो सकता है , इसलिए ही आयुर्वेद को जीवन का विज्ञान कहते है। 

लेखक: 
-डॉ.अभिषेक गुप्ता
ब्रह्म आयुर्वेद, भारत.
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