Tuesday, September 16, 2014

कुपोषण का है आयुर्वेद में निवारण !

कुपोषण का है आयुर्वेद में निवारण !

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हमारा देश दिन-प्रतिदिन विकास की दिशा में कोई न कोई ख्याति प्राप्त कर रहा है! पर हम आज भी कुपोषण नामक अभिशाप से ग्रसित हैं! यह एक चिंताजनक बिषय है ??

कुछ स्वास्थ्य संस्थाओं के द्वारा प्राचीन क्षीरपाक विधि के द्वारा कुपोषित बच्चों पर आयुर्वेदिक औषधियों से बने योग और बला या महामाष तैल के अभ्यंग के प्रयोग से सफल परिणाम देखने को मिले हैं !
क्षीर पाक विधि से बने आयुर्वेद के तेल जैसे क्षीर बला या महामाष तैल आदि का कुपोषित बच्चे के शरीर में नियमित रूप से मालिश करने से लाभ मिलता है ।

-वैसे भी आयुर्वेद इसी सिद्धांत पर आधारित है !
शरीर को स्वस्थ, दृढ और निरोगी बनाए रखना !

-★क्षीर पाक विधि★
यह विधि बहुत ही प्राचीन और चमत्कारिक है !
इस विधि द्वारा सिद्ध की गई औषधि अत्यंत प्रभावशील और गुणवान हो जाती हैं !

-कुपोषण ग्रस्त बालकों में क्षीर पाक विधि में अश्वगंधा , शतावरी , यष्टिमधु एवं सोंठ का योग बहुत ही उपयोगी सिद्ध हुआ है !

-☆इस योग में अश्वगंधा प्रमुख है -
-अश्वगंधा एक बलवर्धक रसायन है। इसके इस गुण की चिर पुरातन से लेकर अब तक सभी चिकित्सकों ने सराहना की है।
-आयुर्वेद के महान चिकित्सक आचार्य चरक ने असगंध/अश्वगंधा को श्रेष्ठ बल बढ़ाने वाला द्रव्य माना है।
-आयुर्वेद के एक और प्राचीन विद्वान आचार्य सुश्रुत के अनुसार यह औषधि किसी भी प्रकार की दुर्बलता कृशता में गुणकारी है।
-शरीर को पुष्टि देने व बलवर्धन की इससे श्रेष्ठ औषधि आयुर्वेद के विद्वान कोई और नहीं मानते।
-यही नहीं सर्द ऋतु में कोई वृद्ध इसका लगातार सेवन करता है, तो इसके लिए बहुत फायदेमंद होता है।
-यह औषधि मूलतः कफ-वात शामक, बलवर्धक रसायन है।
-यह शरीर धातुओं की वृद्धि करती है एवं मांस मज्जा का शोधन करती है। मेधावर्द्धक तथा मस्तिष्क के लिए तनाव शामक भी। मूर्छा, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, शोध विकार, श्वास रोग, शुक्र दौर्बल्य, कुष्ठ सभी में समान रूप से लाभकारी है। यह एक प्रकार के कामोत्तेजक की भूमिका निभाती है परंतु इसका कोई अवांछनीय प्रभाव शरीर पर नहीं देखा गया है। यह ज़रा नाशक है। एजिंग को यह रोकती है व आयु बढ़ाती है।

★-एक शोध से पता चला है कि अश्वगंधा की जड़ में कुछ ऐसे तत्व भी हैं जिसमें कैंसर के ट्यूमर की वृद्धि को रोकने की पर्याप्त क्षमता होती है। इस जड के जलीय एवं अल्कोहलिक फार्मूला का शरीर पर कम विषैला प्रभाव पड़ता है एवं उसमंे ट्यूमर विरोधी गुण प्रबल रूप से पाए जाते हैं। ऐसी प्रबल संभावना है कि अश्वगंधा कैंसर से छुटकारा दिलाने में बहुत सहायक है।

-यदि अश्वगंधा का सेवन लगातार एक वर्ष तक नियमित रूप से किया जाए तो शरीर से सारे विकार बाहर निकल जाते हैं

☆ सूखा रोग (कुपोषित ) से ग्रस्त बालक को इसका क्षीर पाक सेवन कराएं। इसके सेवन से कुछ समय में ही बालक का शरीर हृष्ट-पुष्ट हो जाता है तथा वजन बढ़कर शरीर कांतिमय बन जाता है।

-☆क्षीर पाक बनाने की विधि-
इस विधि में क्षीर पाक करने की मात्रा बालक की आयु और वजन पर निर्भर करती है !
उदाहरण - बालक की उम्र 1-2 वर्ष !
-इस योग की मात्रा 3 ग्राम + दूध 50-75 ml + जल 100-150 ml + 1/2 - 1 चम्मच चीनी सबको एक साथ धीमी आँच पर आधा होने तक पाक करना है !

-सावधानी-
उपर्युक्त प्रयोग किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श से करें। गलत तरीके से किए उपयेाग हानि भी पहुंचा सकते हैं।


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