Friday, September 12, 2014

आयुर्वेद है सबसे सुरक्षित व प्रभावकारी


आयुर्वेद है सबसे सुरक्षित व प्रभावकारी ! जन-जन को इसके प्रति जागरूक करें !

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आयुर्वेद एक पवित्र और निरापद चिकित्सा विज्ञान है , इसका निर्माण लोगों को आरोग्य प्रदान करने और स्वस्थ रखने के लिए लगभग 5000 वर्ष पूर्व किया गया था । इस पवित्र विधा के निर्माण के इतने वर्षों के बाद भी यह विज्ञान लोगों को आज भी रोगों में लाभ पंहुचा रहा है । ऐसा शायद इस कारण से है क्योकि इसका निर्माण जन कल्याण के लिए किया गया था किसी तरह के व्यवसाय या पैसा इकठ्ठा करने के लिए नहीं । इतने वर्षों के बाद भी जो वात, पित्त , कफ , महाभूत , मल , धातु आदि आयुर्वेद के सिद्धांत बनाये गए थे ये सिद्धांत आज भी चिकित्सा में पूरी तरह से अटल और अकाट्य हैं ।

वहीँ इसके विपरीत आधुनिक चिकित्सा विज्ञान है जिसमें रोज नए सिद्धांत बनते है रोज़ यह दावा किया जाता है की रोगों से लड़ने के लिए नई एंटीबायोटिक दवा खोज ली गई है , रोज नई वैक्सीन खोजी जाती है हर नई खोज के बाद बड़े-बड़े दावे होते है की अब इस रोग को जीत लिया गया है । लेकिन कुछ ही दिनों में इन बड़ी-बड़ी खोजों का भेद खुल जाता है जब रोगों में लोगो को लाभ मिलना बंद हो जाता है या इन खोजों के दुष्प्रभाव सामने आते है तब कहा जाने लगता है कि शरीर में मौजूद रोगों के जीवाणुओ /बैक्टीरिया/ वायरस आदि ने इन औषधियों से लड़ने की क्षमता विकसित कर ली है ।

सोचने कि बात है की ऐसा क्यों हो जाता है ? ऐसे क्या कारण है की आधुनिक दवाओं से लड़ने की क्षमता वाले जीवाणु /बैक्टीरिया/ वायरस महज इन दवाओं के बनने के कुछ वर्षों में ही विकसित हो जाते है?

जबकि इसके विपरीत आयुर्वेद की दवाओं से लड़ने वाले जीवाणु /बैक्टीरिया/ वायरस आज तक विकसित ही नहीं हो पाये !

मेरे विचार से ऐसा शायद उद्देश्यों और मकसद के कारण है एक ओर जहाँ आयुर्वेद का निर्माण मानव कल्याण के लिए और बिना धन लाभ के लिए व प्राकृतिक सिद्धांतो को ध्यान में रखकर किया गया था वहीं आधुनिक खोजें सिर्फ पैसा और पैसा कमाने के लिए की जाती हैं जिस कारण से शायद इनके परिणाम दुखद या निराशाजनक होते है ।

आयुर्वेद आज के समय में हर तरह की स्वास्थ्य समस्या के लिए संपूर्ण है ऐसा दावा तो मैं नहीं करता लेकिन जिन रोगों में औषधियों से उपचार की बात आती है तो उसमे आयुर्वेद सर्वश्रेष्ठ है क्योकि इसमें रोग का उपचार नहीं किया जाता बल्कि जिस कारण से रोग उत्पन्न होता है उसका उपचार किया जाता है और रोगों को बढ़ाने वाले कारण जिसमे हमारा आहार सबसे महत्वपूर्ण है उस पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है ।

पवित्र उद्देश्यों से निर्मित आयुर्वेद व इसके प्रकृति से जुड़े चिकित्सा सिद्धांतों के कारण यह चिकित्सा विज्ञान कई गंभीर रोगों जैसे - डायबिटीज , ह्रदय रोग, हाई कोलेस्ट्रोल, हाई बी.पी., किडनी फेलियर , थाइरोइड, आर्थराइटिस, त्वचा से सम्बंधित रोगों, किडनी और पित्त की थैली की पथरी, स्त्रियों से सम्बंधित रोगों, गर्भाशय में गांठ , मानसिक रोगों, ज्वर (बुखार) आदि में विशेष प्रभावशाली है ।

बच्चों के लिए तो आयुर्वेद सबसे उपयुक्त व सुरक्षित है , आयुर्वेद की औषधियों में एक विशेषता यह भी है कि यदि सही तरीके से इनका प्रयोग किया जाये तो न तो इनके किसी तरह के दुष्प्रभाव होते है और न ही किसी तरह का अन्य रोग उत्पन्न होता है ।

आयुर्वेद के सुरक्षित होने का प्रमाण इस बात से लगाया जा सकता है कि आज तक देश में आयुर्वेद की दवाओं के सेवन से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने का कोई भी रिकॉर्ड / केस देश के किसी भी हिस्से में आज तक दर्ज नहीं किया गया है ।
सामान्य जनमानस व आयुर्वेद के चिकित्सकों व इससे जुड़े लोगों से हमारी अपील है की हानिरहित , निरापद, पवित्र चिकित्सा पद्धति का अधिक से अधिक प्रयोग करें व देश और दुनिया में इसका अधिक से अधिक प्रचार प्रसार करें ।

धन्यवाद ! 
डॉ.अभिषेक गुप्ता
ब्रहम आयुर्वेद, भारत 
www.brahmayurved.com

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